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स्कूल में आग से सुरक्षा: हर माता-पिता को क्या पूछना चाहिए

2004 में कुंभकोणम के स्कूल में लगी आग के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने हर स्कूल के लिए आग से सुरक्षा के नियम बनाए। जानिए आपके बच्चे के लिए इनका क्या मतलब है।

2004 में तमिलनाडु के कुंभकोणम के एक स्कूल में मिड-डे मील बनाते समय किचन में आग लग गई। बहुत से बच्चों की जान चली गई। 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि हर स्कूल में आग बुझाने वाले यंत्र और अलार्म हों, किचन क्लासरूम से दूर हो, नियमित फायर ड्रिल हों, और सुरक्षा ऑडिट हों।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की स्कूल सुरक्षा नीति (2016) इसी पर आगे बढ़ती है। इसे मानना कानूनी रूप से ज़रूरी है, और इसमें हर स्कूल की मैनेजमेंट कमेटी से हर तीन महीने में सुरक्षा जाँच करने को कहा गया है, जिसमें आग से सुरक्षा भी शामिल है।

स्कूल से ये सवाल पूछिए

  • क्या स्कूल के पास फायर डिपार्टमेंट का वैध फायर सेफ़्टी सर्टिफ़िकेट (NOC) है?
  • क्या हर मंज़िल पर आग बुझाने वाले यंत्र हैं, उनकी तारीख़ निकली तो नहीं, और क्या स्टाफ़ को उन्हें चलाना आता है?
  • क्या फायर अलार्म लगे हैं, और क्या स्कूल के समय सीढ़ियाँ और बाहर निकलने के रास्ते चौड़े, खाली और खुले रहते हैं?
  • मिड-डे मील या कैंटीन का किचन कहाँ है, और क्या वह क्लासरूम से दूर है?
  • पिछली फायर ड्रिल कब हुई थी, और अगली कब है?

बच्चे को तीन बातें सिखाइए

  1. जल्दी बाहर निकलो। बैग या किताबों के लिए मत रुको।
  2. धुएँ में नीचे झुककर चलो। ज़मीन के पास हवा ज़्यादा साफ़ होती है।
  3. तय जगह पर पहुँचकर टीचर के साथ रहो, ताकि वे सबको गिन सकें।

बच्चे से पूछिए कि पिछली ड्रिल में क्या हुआ था। अगर उसे कोई ड्रिल याद नहीं, तो स्कूल से पूछिए कि अगली ड्रिल कब है।

आग लगने पर112 पर कॉल करें। अगर बाहर निकलने के रास्ते बंद, सीढ़ियाँ रुकी हुई या आग बुझाने वाले यंत्र गायब दिखें, तो प्रिंसिपल को लिखकर बताएँ। शिकायत कहाँ करें देखें।

स्रोत

यह पोस्ट सामान्य जानकारी है। नियम राज्य और बोर्ड के हिसाब से अलग हो सकते हैं, इसलिए अपने स्कूल से उसकी अपनी योजना के बारे में पूछें।