भारत संस्करण: स्कूल सुरक्षा, परिवारों और स्टाफ़ के लिए आसान भाषा में

क्या आपके बच्चे की स्कूल बस सुरक्षित है? क्या देखें

स्कूल बसों के लिए देशभर में साफ़ सुरक्षा नियम हैं। बहुत-सी वैन और ऑटो इन्हें नहीं मानते। यहाँ जानिए क्या देखना है, और कुछ गड़बड़ हो तो क्या करना है।

सुप्रीम कोर्ट और CBSE ने स्कूल बसों के लिए साफ़ नियम बनाए हैं। स्कूल बस पीले रंग की होनी चाहिए, दोनों तरफ़ स्कूल का नाम लिखा हो, और आगे-पीछे “School Bus” लिखा हो। किराये की बस पर “On School Duty” लिखा होना चाहिए।

नियम क्या कहते हैं

  • स्पीड गवर्नर, ताकि बस 40 km/h से तेज़ न चल सके।
  • एक ट्रेंड अटेंडेंट जो बच्चों का ध्यान रखे, सिर्फ़ ड्राइवर नहीं।
  • फ़र्स्ट एड बॉक्स और चालू हालत में आग बुझाने वाला यंत्र।
  • दरवाज़ों पर ठीक से लॉक, और चलती बस में दरवाज़े बंद रहें।
  • अंदर और बाहर जानकारी लिखी हो: ड्राइवर का नाम और लाइसेंस नंबर, और स्कूल का फ़ोन नंबर।
  • कोई बाहरी व्यक्ति नहीं। सिर्फ़ ड्राइवर, कंडक्टर, अटेंडेंट और माता-पिता ही बस में चढ़ सकते हैं।

CBSE ने चेतावनी दी है कि जो स्कूल ये नियम नहीं मानते, उनकी मान्यता (affiliation) जा सकती है। कई राज्यों में स्कूल बसों में GPS और CCTV भी ज़रूरी हैं, इसलिए पूछिए कि आपके राज्य में क्या नियम है।

वैन और ऑटो

सबसे ज़्यादा दिक्कत प्राइवेट वैन और ऑटो में होती है: क्षमता से ज़्यादा बच्चे, कोई अटेंडेंट नहीं, और ड्राइवर की कोई जाँच नहीं। अगर आपका बच्चा ऐसे जाता है, तो स्कूल से पूछिए कि गाड़ी मंज़ूर है या नहीं, गिनिए कि उसमें कितने बच्चे बैठते हैं, और ड्राइवर से खुद मिलिए।

आप क्या कर सकते हैं

अपने स्टॉप पर कुछ बार बस को ध्यान से देखिए। बच्चे से पूछिए कि सफ़र कैसा रहता है और कोई बात उसे परेशान तो नहीं करती। कोई समस्या हो तो पेरेंट-टीचर मीटिंग में उठाइए, या प्रिंसिपल को लिखकर बताइए और उसकी कॉपी अपने पास रखिए।

कुछ गड़बड़ हो तोअगर बच्चों से भरी कोई गाड़ी खतरनाक तरीके से चलाई जा रही हो, तो 112 पर कॉल करें। बाकी समस्याओं के लिए प्रिंसिपल को लिखें। और नंबरों के लिए शिकायत कहाँ करें देखें।

स्रोत

यह पोस्ट सामान्य जानकारी है। नियम राज्य और बोर्ड के हिसाब से अलग हो सकते हैं, इसलिए अपने स्कूल से उसकी अपनी योजना के बारे में पूछें।